भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 1
भाग 1 “भारतीय शिक्षण प्रणाली का एक सुन्दर वटवृक्ष तुम अंग्रेजोंने कांट दिया है, जिसके कारण आज भारतीय समाज जितना 100 वर्ष पूर्व निरक्षर था उससे कई गुना अधिक निरक्षर हो गया है” - गांधीजी. यह शब्द थे 1931 में, ब्रिटन की गोलमेजी परिषदमें, भारत का नेतृत्व कर रहे गांधीजी के. गांधीजी के इस कथन को ब्रिटिश सांसद फिलिप हर्तोगने तथ्यों के आधार पर सिद्ध करनेकी चुनौती दी, जिसके उत्तरमें गांधीजीने कहा की वे अपनी बात सिद्ध करके दिखाएंगे. किन्तु समय समाप्त हो चूका था इसलिए गांधीजी अपनी बात प्रमाणित नहीं कर पाए. सामान्य रूपसे यह माना जाता है की अंग्रेजों ने आकर भारतमें शिक्षण प्रणाली की स्थापना की और देशको साक्षरता प्रदान की. जबकि गांधीजी का कथन इससे बिलकुल विपरीत ही कहता है. वे कह रहे है की अंग्रेजों ने आकर भारतको निरक्षर बना दिया. दुर्भाग्यसे इतिहासने फिर कभी गांधीजी को अपनी बात प्रमाणित करनेका अवसर नहीं दिया. किन्तु जो सत्य था वो कभी न कभी अपने आप उजागर होने ही वाला था. तो आइए देखते है की गांधीजी अपने कथनमें कितने सही थे, और अंग्रेजोंने शिक्षण के नाम पर भारत को क्या प्रदान किया......