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भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 3

भाग 3 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें अब मेकोले भारत के Education Board का चेयरमैन बन चूका था. तुरंत ही मेकोले ने अपना अभियान गतिमान कर दिया और भारत में मिशनरी स्कूलों की स्थापना होने लगी. मेकोले का मूल उद्देश्य न केवल भारतीयों को ब्रिटन के मानसिक दास बनाने का था , किन्तु उन्हें पुरे भारत को इसाइ संप्रदायी भी बनाना था. मेकोले का यह अभियान बहोत ही कठिन था. यह बात उसे शीघ्र ही समजमें आ गई की भारतीय समाज केवल शिक्षण के आधार पर नहीं टिका हुआ था , अपितु उसकी समाज व्यवस्था ही इतनी ठोस थी की उसे हिलाना अत्यंत कठिन काम था. परापूर्वसे देशके गांव गांवमें 35% से 50% भूमि खुली छोडी जाती थी जिसका कोई एक व्यक्ति मालिक नहीं होता था , अपितु पूरा गांव उस भूमि का सामूहिक उपभोग करता था. इस भूमि को गौचर की भूमि भी कहा जाता था. इस भूमिमें सामूहिक प्रसंग होते थे , औषधियां उगाई जाती थी , त्यौहार मनाए जाते थे , यात्रिओं के लिए भोजन व् रहनेकी व्यवस्था की जाती थी , जलाशय बनाए जाते थे , गायों को चराया जाता था इत्यादि. इसी भूमि पर पाठशालाएँ एवम गुरुकुल भी चलाए जाते थे. ...

भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 2

भाग 2 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भारतके शैक्षणिक निकंदनकी इस कथा का आरम्भ होता है 1835 से जब लार्ड मेकोले पुरे भारतका सर्वेक्षण करनेके पश्चात ब्रिटिश संसद में अपना प्रस्ताव ले कर जाते है. " मैंने भारत देश के प्रत्येक कोने कोने को छान मारा है और मैंने एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं देखा जो भिखारी हो या चोर हो. ऎसी सम्पति देखि है, ऐसे उच्च आदर्श देखे है, ऐसे सक्षम लोग देखे है, की मुझे लगता है की हम कभी भी इस देश को जित नहीं सकते. यदि जीतना है तो हमें उस सभ्यता की नीवमें रही उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को तोडना होगा. इसलिए मैं यह प्रास्ताव रखता हूँ की उनकी पारंपरिक शिक्षण प्रणाली और संस्कृति को इस प्रकार बदल दिया जाए जिससे वे सोचने लगे की जो भी विदेशी या अंग्रेजी है वो उनसे स्वयं से उत्तम और महान है. वे लोग अपना आत्मसन्मान खो बैठेंगे, अपनी पौराणिक संस्कृति भूल बैठेंगे, और अन्तमें वे वही बन जाएंगे जो हम उन्हें बनाना चाहते है.... एक ऐसा राष्ट्र जिसपे हमारा पूर्णतः प्रभुत्व होगा " . -- लार्ड थॉमस मेकोले, ब्रिटिश संसद, 1835 ऊपर लिखा हुआ मेकोले का...

भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 1

भाग 1 “भारतीय शिक्षण प्रणाली का एक सुन्दर वटवृक्ष तुम अंग्रेजोंने कांट दिया है, जिसके कारण आज भारतीय समाज जितना 100 वर्ष पूर्व निरक्षर था उससे कई गुना अधिक निरक्षर हो गया है” - गांधीजी. यह शब्द थे 1931 में, ब्रिटन की गोलमेजी परिषदमें, भारत का नेतृत्व कर रहे गांधीजी के. गांधीजी के इस कथन को ब्रिटिश सांसद फिलिप हर्तोगने तथ्यों के आधार पर सिद्ध करनेकी चुनौती दी, जिसके उत्तरमें गांधीजीने कहा की वे अपनी बात सिद्ध करके दिखाएंगे. किन्तु समय समाप्त हो चूका था इसलिए गांधीजी अपनी बात प्रमाणित नहीं कर पाए. सामान्य रूपसे यह माना जाता है की अंग्रेजों ने आकर भारतमें शिक्षण प्रणाली की स्थापना की और देशको साक्षरता प्रदान की. जबकि गांधीजी का कथन इससे बिलकुल विपरीत ही कहता है. वे कह रहे है की अंग्रेजों ने आकर भारतको निरक्षर बना दिया. दुर्भाग्यसे इतिहासने फिर कभी गांधीजी को अपनी बात प्रमाणित करनेका अवसर नहीं दिया. किन्तु जो सत्य था वो कभी न कभी अपने आप उजागर होने ही वाला था. तो आइए देखते है की गांधीजी अपने कथनमें कितने सही थे, और अंग्रेजोंने शिक्षण के नाम पर भारत को क्या प्रदान किया......

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