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गणपति स्थापना, पूजन और विसर्जन क्यों करना और कैसे करना चाहिए?

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Everything That You Want To Know About Ganpati Sthapna गणपति देव का महात्म्य: सनातन धर्म में प्रत्येक लौकिक और परलौकिक कार्यों के लिए किसी न किसी “Specialist” देवता की व्यवस्था की गई है. तेजस प्राप्ति के लिए सूर्य, बल व् ब्रम्हचर्य के लिए हनुमानजी, धन के लिए लक्ष्मी, विध्या के लिए सरस्वती, विनाश के लिए भैरव, दुर्गा , काली इत्यादि देवता उपलब्ध है. इसी प्रकार कार्यारंभ और विघ्न विनाश का “Department” गणपति देव के आधीन है. रिध्धि और सिध्धि उनकी पत्नी है. रिध्धि का अर्थ है ऐसी समृद्धि जो की संतोषदायी और सुखदायी हो. और सिध्धि का अर्थ है किसी भी कला एवं कौशल का हस्तगत करना. तो स्वाभाविक रूपसे यह स्पष्ट हो जाता है की गणपति देव रिध्धि और सिध्धि को प्राप्त करनेमें आनेवाली बाधाओं को नाश करते है. जब एक साधक अथवा योगी अपनी साधना करता है तब सदैव उसे अपने साध्य को प्राप्त करनेमें अनेक विघ्न उपस्थित होते है. उदहारण के लिए परमेश्वर प्राप्ति की साधना करने वाले योगी जब अपनी साधना के बिचमें होता है तब उसे भ्रमित करने वाली अनेक सिध्धियाँ प्राप्त होती है. यह सिध्धियाँ लुभावनी होती है जो साधक ...

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