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भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 6

भाग 6 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 3 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 4 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 5 के लिए यहाँ क्लिक करें समय अंग्रेजों के पक्षमे चल रहा था. 1830 के समय से जब मेकोले ने अपनी स्खुलें आरंभ की थी तब तक हिन्दूओं के सारे वर्ण के लोग आर्थिक और सामजिक रूपसे संपन्न और सुखी थे. समाज में शौच के प्रयोजन के कारण अस्पृश्यता का चलन अवश्य था किन्तु एकदूसरे की कोई इर्षा नहीं करता था. सारे समाज अपने अपने परंपरागत व्यवसाय करते हुए एक-दुसरे के साथ सहजीवन व्यतीत कर रहे थे. और जिन्हें अपना वर्ण बदलना था वे सहजतासे बदल लेते थे. परंतु अब परिस्थिति बदलने वाली थी. 50 वर्ष के अंग्रेज साशनने देश को अत्यंत दरिद्र बना दिया था. आर्थिक संपदाएं नाश हो रही थी. समाज में आर्थिक हितों के कारण आंतरकलह बढ़ रहा था. इस समय उत्तर भारत के ब्राम्हण समुदाय को मिला हुआ अंग्रेजी शिक्षण काम आ रहा था. ब्राम्हणों को पद प्राप्त हो रहे थे और आर्थिक परिस्थिति भी सुधर रही थी. आर्थिक सम्पन्नताके कारण अपने परंपरागत व्यवसाय के उपरांत अब वे प्रशाशनिक, खेतीबाड़ी और अन्य आर्थिक प्रवृत्तिया...

भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 5

भाग 5 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 3 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 4 के लिए यहाँ क्लिक करें अब आर्थिक रूपसे क्षीण हुए, और शैक्षणिक रूपसे दरिद्र हुए भारतियों को केवल पश्चिमी रंगसे रंगनेका काम शेष रह गया था. सन 1836 में जब मेकोले ने कई अंग्रेजी स्कूलों की स्थापना कर दी थी तो वह अपने कार्य के प्रति बहोत उत्साहित था और उसे यह काम बहोत सरल लग रहा था. वो उसी वर्ष अपने पिता को एक पत्रमें लिखता है की.... “हमारी अंग्रेजी स्कूलें धूमधाम से बढ़ रही है; हमें सबको पर्याप्त प्रशिक्षण देना भी कठिन हो रहा है. हिन्दुओं पर हमारे शिक्षण का प्रभाव अत्यंत गहरा हो रहा है. ऐसा कोई हिन्दू नहीं है जो अंग्रेजी शिक्षण लेनेके बाद सही अर्थ में अपने धर्म से जुड़ा रहता है. में यह स्पष्ट रूपसे मानता हु की यदि शिक्षण की हमारी योजनाओं को ठिकसे प्रोत्साहन दिया गया तो आजसे 30 वर्ष बाद एक भी मूर्तिपूजक (हिन्दू) नहीं रहेगा. और यह सब उन्हें इसाई बनानेका कष्ट उठाए बिना ही हो जाएगा; मैं उस दिनके विचार मात्र से अति-उत्साहित हो उठता हूँ.” इस आत्मविश्वास के साथ हिन्दुओ को हिंदुत्व...

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