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भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 4

भाग 4 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 3 के लिए यहाँ क्लिक करें Indian Education Board का चेयरमैन मेकोले 19वी सदी के आरंभ से ही देशमें इसाई मिशनरी स्कूलें बनाने लगा था. किंतु केवल इसाई मिशनरी स्कूलें बनाने से काम नहीं बनने वाला था. परापूर्व से चली आ रही भारत की सुद्रढ़ शिक्षण प्रणाली को मिटाने के लिए सर्वप्रथम तो गांव गांव में फैली देसी पाठशालाओं को ध्वस्त करना अनिवार्य था. इसलिए मेकोले ने ऐसे नियम बनाए की जो पाठशालाएँ पक्की ईमारत से न बनी हो, या अमुक विदेशी विषय न पढ़ाती हो ऐसी पाठशालाएँ असंवैधानिक बन गई. उस समयकी पाठशालाएँ पेड़ के निचे खुलेमें बैठकर चलाई जाती थी. जो भी ज्ञान दिया जाता था वो प्रत्यक्ष और प्रायोगिक (practical) ज्ञान दिया जाता था.  और विषय पढ़ाने वाले शिक्षक भी केवल देशी विषय ही जानते थे. पक्की पाठशालाओं के उपरांत एक और नियम अंग्रेज लाए जिसने भारतकी समाज व्यवस्थाकी कमर तोड़ दी. जैसा हमने भाग 3 में देखा की गाओंकी 35% से 50% भूमि खुली छोडी जाती थी. अंग्रेजोंने इसको कम करके केवल 5% कर दिया. भारतियोंने इस निर्णय का विरोध किया, किंतु ...

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