हाँ। प्रभु श्री राम का सीता त्याग सही था। और उत्तर रामायण प्रक्षिप्त नहीं है।
आजकल के सामान्य लोगों की तो क्या बात करनी, कुछ धर्माचार्य और कथावाचक भी कहते रहते है की रामजीको सीता माता का त्याग नहीं करना चाहिए था। हमारे लाखों वर्षों के इतिहासमें किसीभी ग्रंथमें या किसीभी मान्य संप्रदाय के आचार्यने ये कभी नहीं कहा, पर ये आजकल के महाज्ञानी लोग - नारीवादियों के प्रभावमें आकर - अनर्गल प्रलाप कर रहे है क्योंकि उनको शास्त्रों को समजनेकी यथार्थ दृष्टि नहीं है। चलिए देखते है की इन निर्लज्जों के द्वारा प्रभु श्री राम के ऊपर क्या क्या आरोप लगाए जाते है। ------------------------------------------------------------------------------------------------------------ मेरा अपना मंतव्य सर्प्रथम तो मैं अपना मंतव्य बता दूं. मैं प्रभु श्री राम और माता जानकी का - और समस्त पंचदेवों का - भक्त हुं। इसलिए उन्होंने कुछ भी गलत किया ऐसा मैं न सोच सकता हुं, न मान सकता हुं। भगवान् के अवतारोंकी लीला रसास्वादन के लिए होती है, भावविभोर होनेके लिए होती है, भक्ति के सागरमें डूबनेके लिए होती है........ टिका-टिपण्णी, आलोचना, तर्क-वितर्क-कुतर्क करनेके लिए नहीं होती। अवतार कुछभी गलत नहीं करते...