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Showing posts from 2016

भारत-पाक के बिच परमाणु युद्ध की संभावना; वास्तविकता या धूर्त पाकिस्तान का छलावा?

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हाल ही में हुई Surgical Strike से भारत और पाकिस्तान के बिच संभवित युद्ध की चर्चा बहोत चल पड़ी है. इस चर्चामें थोड़े बहोत जानकार लोग परमाणु युद्ध के भय की चर्चा करते है. इस चर्चामें बहोतसे लोग कई घिसे पिटे तर्क देते है जो की सुनकर तो प्रभावी लगते है परंतु वास्तविकता की कसौटी पर निरर्थक सिद्ध होते है. आइये देखते है की ऐसे घिसे पिटे तर्क कौन कौनसे है... दो परमाणु देशों को लड़ाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि परमाणु बम से बहोत बड़ी मात्रामें जान हानि होती है. पाकिस्तान का कोई आतंकवादी भारतमें घुसकर परमाणु बम फोड देगा तो? पाकिस्तान एक पागल देश है और उनके सैन्य अधिकारी भी पागल है, आत्मघाती है. और फिर पाकिस्तान एक भिखारी देश है इसलिए उन्हें कुछभी खोनेका डर नहीं है, जबकि भारतको खोनेके लिए बहोत कुछ है. इस परिस्थितिमें यदि वे हारनेकी परिस्थितिमें आ जाएंगे तो भारत पर परमाणु हमला कर देंगे. यदि पाकिस्तान ने पहले परमाणु हमला करके हमारे सारे परमाणु बम नष्ट कर दिए तो? पाकिस्तान के पास Tactical Nuclear Bomb है जिसका उपयोग वे सामान्य बम की भांति कर सकते है जिसका जवाब हम बड़े न्यूक्लियर बम से नह...

गणपति स्थापना, पूजन और विसर्जन क्यों करना और कैसे करना चाहिए?

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Everything That You Want To Know About Ganpati Sthapna गणपति देव का महात्म्य: सनातन धर्म में प्रत्येक लौकिक और परलौकिक कार्यों के लिए किसी न किसी “Specialist” देवता की व्यवस्था की गई है. तेजस प्राप्ति के लिए सूर्य, बल व् ब्रम्हचर्य के लिए हनुमानजी, धन के लिए लक्ष्मी, विध्या के लिए सरस्वती, विनाश के लिए भैरव, दुर्गा , काली इत्यादि देवता उपलब्ध है. इसी प्रकार कार्यारंभ और विघ्न विनाश का “Department” गणपति देव के आधीन है. रिध्धि और सिध्धि उनकी पत्नी है. रिध्धि का अर्थ है ऐसी समृद्धि जो की संतोषदायी और सुखदायी हो. और सिध्धि का अर्थ है किसी भी कला एवं कौशल का हस्तगत करना. तो स्वाभाविक रूपसे यह स्पष्ट हो जाता है की गणपति देव रिध्धि और सिध्धि को प्राप्त करनेमें आनेवाली बाधाओं को नाश करते है. जब एक साधक अथवा योगी अपनी साधना करता है तब सदैव उसे अपने साध्य को प्राप्त करनेमें अनेक विघ्न उपस्थित होते है. उदहारण के लिए परमेश्वर प्राप्ति की साधना करने वाले योगी जब अपनी साधना के बिचमें होता है तब उसे भ्रमित करने वाली अनेक सिध्धियाँ प्राप्त होती है. यह सिध्धियाँ लुभावनी होती है जो साधक ...

क्या भारतीय समाज बलात्कारी है? या स्वपीडनवृति से ग्रसित एक मनोरोगी है?

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रक्षाबंधन का दिन था. Whatsapp पर भाई बहन के प्यार और संस्कृति के गुणगान गानेवाले मेसेज दिन को भावनात्मक बना रहे थे. और ऐसेमें एक मेसेज कुछ इस प्रकार आ गया... यह केवल एक मेसेज नहीं था, ऐसे अनेक मेसेज दिनभर आते रहे जिसमें किस प्रकार भारत देशमें महिलाओं का निरंतर उत्पीडन हो रहा है इसके बारेमें हमें "जागृत" किया जा रहा था! अब स्वाभाविक रूपसे यह प्रश्न होता है की क्या भारतीय समाज इतना नीच और पिशाची है की हमसे हमारे त्योहारों पर भी महिलाओं का सन्मान करने के लिए "जागृत" किये बिना रहा नहीं जाता? क्या हम रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहारों पर भी अपने आपको लज्जित किये बिना नहीं रह सकते? हमारे इस व्यवहार के केवल दो ही कारण हो सकते है... 1. या तो हम एक निर्लज्ज बलात्कारी समाज है जिसे रोज रोज बलात्कार न करने के लिए समजाना पड़ रहा है. 2. या तो हमारा समाज स्वपीडनवृति से ग्रसित है इसलिए हमें स्व-आलोचना में ही आनंद आता है. अब हम थोडा जमीनी वास्तविकता पर द्रश्तिपात करते है.... विविध देशों के अनेक विषयों के सर्वेक्षण और उनकी तुलना करने वाली एक आंतरराष्ट...

ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से निष्काषित होना (Brexit), और इसके परिणाम

ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन (EU) से निष्काषित क्यों हुआ? इसके परिणाम क्या हो सकते है? इस प्रश्न का उत्तर समजने से पहले हम समय के पहियों को उल्टा घुमाके 1947 में ले जाते है जब भारत ब्रिटेन के पिशाची साशन से स्वतंत्र हो रहा था. उस समय तथाकथित अहिंसा से नहीं, परन्तु भारतीय सेना के द्वारा विद्रोह किये जानेपर भयभीत होकर अंग्रेजों को स्वतंत्रता देनी पड़ रही थी. इस बात से चिडकर तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री और दोनों विश्वयुद्धों के खलनायक विंस्टन चर्चिल ने यह कहा... "भारतीय लोग प्रशाशन करने के लिए सक्षम नहि है, वे प्रशाषित होनेके ही लायक है. कुछ ही समयमें  वे हमारे पास आयेंगे और ब्रिटेन को पुनः अपना स्वामी बनने के लिए भीख मांगेंगे" ब्रिटेन का यह अहंकार केवल भारत के लिए नहीं था. विश्वके सभी समुदायों के प्रति नीचपन दिखाना ब्रिटेन का स्वाभाव बन चूका था. स्वयं राजाशाही में रहनेके कारण जब फ्रांस ने अपने क्रूर राजा के विरुद्ध क्रांति चलाई तब अंग्रेजोंने फ्रांस के नागरिकों के प्रति विश्वभरमें घृणा फैलाई और यह जताया की फ़्रांसिसी लोग कितने असहिष्णु है. जब अमेरिका ने ब्रिटेन से स्वतंत्रत...

भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 8

भाग ૮ भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 3 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 4 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 5 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 6 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 7 के लिए यहाँ क्लिक करें इसाई गोवा में पुर्तगाली पादरिओं द्वारा किये गए दमन और उसका छत्रपति शिवाजी द्वारा दिया गया उत्तर अंग्रेजों को याद था. अत्यंत ही बर्बर नरसंहारो से कोंकणी हिन्दुओं को महत्तम रूपसे इसाई बनाया गया था. इसके प्रत्युत्तर में छत्रपति शिवाजी ने अनेक पुर्तगाली पादरिओं को निर्ममता से मार दिया था और हिन्दुओं का पंथ परिवर्तन रोक दिया था. इसलिए अंग्रेज शिक्षण के माध्यम से पंथ परिवर्तन करना चाहते थे. मिशनरीयों ने अत्यधिक ध्यान भारत के स्त्री धन पर दिया. वे जानते थी की यदि भारतीय समाज को ध्वस्त करना है तो इसके स्त्री धन का मानसपरिवर्तन करना होगा क्योंकि हिन्दू धर्म और परम्पराएं स्त्रिओं से टिकी हुई है, पुरुषों से नहीं. उन्होंने मिशनरीयों में पढने आती बालिकाओं को धर्म से विमुख करनेका काम बड़ी ही चतुराई से किया, और आज भी कर रहे है. मेकोले के समय से ही इसाई मिशनरी स्कूलें भार...

भारतीय शिक्षण प्रणालीका इतिहास और उसका अंग्रेजों द्वारा किया गया निकंदन - भाग 7

भाग 7 भाग 1 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 2 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 3 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 4 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 5 के लिए यहाँ क्लिक करें भाग 6 के लिए यहाँ क्लिक करें अंग्रेजो द्वरा हिन्दुओं की संस्कृति और परम्पराओं का पर्याप्त रूपसे विकृतीकरण हो रहा था. अब केवल दूसरी विदेशी सभ्यताओं का महिमामंडन करना शेष रह गया था. ऐसा करनेका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं के मनमें हिंदुत्व के प्रति घृणा उत्पन्न करनेका था. तो देखते है की अंग्रेजोंने भारतमे व्याप्त विविध विदेशी पंथो को कैसे प्रोत्साहन दिया. इस्लाम अंग्रेजों की सामान्य रूपसे मुस्लिम नवाबों से बहोत बनती थी. उत्तर भारत में, खास करके मैदानी विस्तार में "गंगा-जमनी  तहज़ीब" के नाम पर मुस्लिम जमीनदारों, नवाबों, इतिहासकारों, साहित्यकारों और कविओं को अत्यधिक प्रोत्साहन दिया गया. आर्थिक रूपसे उच्च वर्ग का एक संकुल बनाया गया जो की या तो अंग्रेजी या तो उर्दू बोलता था, केवल मुस्लिम साशकों का "स्वर्णिम इतिहास" पढता था (और लिख लिख कर सबको पढ़ता था), हिंदी कविताओं के स्थान पर उर्दू शेरो-शायरी में रूचि रखता...

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