इतना पापाचार होनेपरभी भगवान् अवतार लेकर क्यों नहीं आते?
आपने बहोत लोगोंको ऐसा कहते हुए सुना होगा की पृथ्वी पर इतने सारा पापाचार हो रहा है, फिरभी भगवन अवतार धारण करके क्यों नहीं आ रहे है ? एक रावणको मारने के लिए भगवानने रामावतार धारण किया, आज लाखो करोडो रावण होनेके उपरांत भी भगवन क्यों नहीं आते ? क्या भगवन उन्होंने स्वयं ही दिया हुआ वचन भूल गए की “संभवामि युगे युगे” .. इत्यादि इत्यादि.. सबसे पहली बात तो यह है की जब भगवन यह कहते है की अधर्मका नाश करने के लिए मैं समय समय पर अवतार धारण करूँगा , तब वे स्वाभाविक रूपसे ही यह भी कह देते है की बार बार नाश करने पर भी अधर्म और पापाचार अपना प्रसार पुनः कर ही देगा. पापीजन तो बढ़ने ही वाले है , धर्मका निकंदन तो निकलने ही वाला है. अर्थात यह तो श्रृष्टिका क्रम है. तो यदि यह श्रृष्टिका क्रम ही है तो फिर दुखी क्यों होना ? और फिर यदि यह श्रृष्टिका क्रम ही है तो अवतार कब लेना है यह निर्णय भी हम श्रृष्टिके रचयता पर ही क्यों ना छोड़ दे ? फिरभी यदि हमारा मायागत अहम् हमको यह बात स्वीकारने नहीं देता है और सतत यही प्रश्न हो रहा है की क्यों भगवन अवतार नहीं ले रहे है तो यह प्रश्न हम दूसरोंको पूछनेकी अपेक...