क्या भारतीय समाज बलात्कारी है? या स्वपीडनवृति से ग्रसित एक मनोरोगी है?
रक्षाबंधन का दिन था. Whatsapp पर भाई बहन के प्यार और संस्कृति के गुणगान गानेवाले मेसेज दिन को भावनात्मक बना रहे थे. और ऐसेमें एक मेसेज कुछ इस प्रकार आ गया... यह केवल एक मेसेज नहीं था, ऐसे अनेक मेसेज दिनभर आते रहे जिसमें किस प्रकार भारत देशमें महिलाओं का निरंतर उत्पीडन हो रहा है इसके बारेमें हमें "जागृत" किया जा रहा था! अब स्वाभाविक रूपसे यह प्रश्न होता है की क्या भारतीय समाज इतना नीच और पिशाची है की हमसे हमारे त्योहारों पर भी महिलाओं का सन्मान करने के लिए "जागृत" किये बिना रहा नहीं जाता? क्या हम रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहारों पर भी अपने आपको लज्जित किये बिना नहीं रह सकते? हमारे इस व्यवहार के केवल दो ही कारण हो सकते है... 1. या तो हम एक निर्लज्ज बलात्कारी समाज है जिसे रोज रोज बलात्कार न करने के लिए समजाना पड़ रहा है. 2. या तो हमारा समाज स्वपीडनवृति से ग्रसित है इसलिए हमें स्व-आलोचना में ही आनंद आता है. अब हम थोडा जमीनी वास्तविकता पर द्रश्तिपात करते है.... विविध देशों के अनेक विषयों के सर्वेक्षण और उनकी तुलना करने वाली एक आंतरराष्ट...