कर्म सिद्धान्त - भाग ६ - मानसिक कर्मों का फल कैसे मिलता है?
इस लेख श्रृंखला के पिछले अंक में हमने देखा: कर्म सिद्धांत – भाग ५ – भाग्य अधिक बलवान है या कर्म? कर्मों से मुक्ति कैसे मिलती है? भक्त लोग क्यों अधिक दुःखी रहते हैं? इस लेख में हम देखेंगे कि: मानसिक कर्मों की क्या गति होती है? क्या किसी को मन-ही-मन में गाली देने से, किसी का अहित चाहने से, या मन-ही-मन में भगवान का स्मरण करने से फल मिलता है? क्या ऑनलाइन हिंसक वीडियो गेम खेलने से या हस्तमैथुन करने से पाप लगता है? --------------------------------------------------------------------------------------- मानसिक कर्मों की क्या गति होती है? हमने पहले देखा था कि कर्मों की गति बहुत गहन होती है, लेकिन मानसिक कर्मों की गति तो उससे भी कहीं अधिक गहन होती है। शास्त्रों के सामान्य नियम के अनुसार, किसी भी कर्म के पीछे की भावना ही यह निश्चित करती है कि उस कर्म का कैसा फल मिलेगा। हर कर्म पहले मन में होता है, फिर बाद में भौतिक रूप से किया जाता है। इसलिए मन से किए गए कर्म का फल तो मिलना ही है, चाहे बाद में किसी भी कारण से, वह भौतिक रूप से किया न गया हो। यदि किसी की हत्या करने का मानसि...