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Showing posts from 2020

शाकाहार से भी जीवहत्या होती है तो मांसाहार का विरोध क्यों?

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यह प्रश्न बहोत शाकाहारियों ने जिला होगा. इस प्रश्न का शास्त्रीय उत्तर धर्म धुरंधर परम पूज्य पूरी शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वति जी ने स्वयं दिया है. मैं क्या उनकी माँ शारदा स्वरुप वाणी को यहांपर शब्दों में निरूपित करूँगा? मैं उनका स्वयं वीडियो ही यहांपर रख देता हु. जिज्ञासु जन इस वीडियो को देखें और अपना कल्याण करें। 🙏

क्या वास्तव में हिन्दुओं के इतिहास में बहुपत्नी प्रथा थी? क्या राजाओं की अनेक पत्नियां बहुपत्नी प्रथा के कारण थी?

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प्रायः आपने हिन्दू विरोधी मानसिकता वाले लोगों को ऐसी टिपण्णी करते देखा होगा की यदि मुस्लिमो में चार-चार  पत्नी करने का आदेश है, तो हिन्दुओं में भी पुरातन काल के प्रत्येक राजा एक से अधिक पत्नियां रखते ही थे. तो बहुपत्नी प्रथा तो हिन्दुओं में भी थी. तो किस मुँह से अन्य मजहबों की टिका कर रहे हो? बात सुनाने में तारिक और सच्ची लगती है, इसलिए हमारे पास कोई उत्तर नहीं होता।  परंतु वास्तव में ऐसा है नहीं!  हिन्दुओं में अकारण ही एक से अधिक पत्नी करना वर्जित है .  कुछ अपवाद स्थिति में अनुमति है, पर उन अपवादों को हम आगे देखेंगे। सर्वप्रथम तो मैं मुस्लिम बहुपत्नीत्व और हिन्दू विवाह व्यवस्था की तुलना की ही कठोर भर्तसना करता हु. क्या आप जानते है की 'शादी' एक मूल फ़ारसी शब्द है,और इसका अर्थ होता है 'विलास'. और सीधी सादी भाषा में कहें तो 'मौज'! और इस्लामी सभ्यता में शादी करनेका अर्थ है एक 'अनुबंध' (contract) करना। इसका अर्थ यह हुआ की शादी करनेका अर्थ है 'मौज करनेका कॉन्ट्रैक्ट' करना। इस्लाम में शादी की कल्पना केवल पुरुष के शारीरिक सुख के लिए ही की गई है, और यह अन...

मैथुन क्रिया के विषय में शास्त्रों का क्या मत है?

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मैथुन क्रिया एक ऐसा विषय है की जिसके विषयमें लगभग प्रत्येक व्यक्तिका अपना कोई न कोई अभिप्राय अवश्य ही है, परंतु सभ्य समाजमें इसके विषयमें चर्चा करना अयोग्य और असंस्कृत माना जाता है. यद्यपि हमारे शास्त्रोनें इस विषयको कभी अस्पृश्य नहीं माना है. अस्पृश्य तो क्या, शास्त्रोनें तो मैथुन क्रिया को मानव जीवनके चार महाकर्मों मेंसे एक माना है. धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष, यह प्रत्येक मनुष्यके 4 ऐसे कर्म है जो की नीतिपूर्ण और शास्त्रोक्त विधि से किये जानेपर मनुष्य का कल्याण होता है. कामसूत्र के रचयिता ऋषि वात्स्यायन चारों वेदों के प्रकाण्ड पंडित थे (आज के समयमें चारों वेदों के पंडित हो ऐसे विद्वान् पुरे देशमें पुरे 10 भी नहीं होंगे). वात्स्यायन ऋषि की रचना 'कामसूत्र' के विषयमें तो हम सब जानते है, पर यह बात बहोत कम लोग जानते है की वेदों के भाष्यकारों में भी वात्स्यायन ऋषि का नाम अतिआदर पूर्वक लिया जाता है. उपरोक्त पूर्वभूमिका के द्वारा हम यह समज सकते है की काम वासना होना या इसकी तृप्ति के लिए रत होना, यह कोई अधार्मिक बात नहीं है. फिरभी, जीवन के अन्य अनेक विषयभोगों की ही भांति, इस विषयभोग के...

हिन्दुओं की घटती जनसँख्या का उपाय यदि कानून या सामाजिक जागृति से नहीं हो सकता, तो कैसे हो सकता है? - भाग 2

इस भागमें हम देखेंगे की हिन्दुओं की जनसँख्या की समस्या कितनी बड़ी है, क्यों यह समस्या है, और उसका उपाय क्या है. हमने इस लेख श्रेणी के भाग 1 में देखा की अधिक जनसँख्या कोई समस्या नहीं है, परंतु कम जनसँख्या अवश्य ही एक बहोत बड़ी समस्या है. अब आप कल्पना करीए की यदि भारतमें ही हिन्दुओंकी संख्या कम हो गई तो परिणाम क्या हो सकता है! क्यों हिन्दुओं के जन्मदर को बढ़ाना अतिआवश्यक है? भारतमें वर्तमान स्थिति के अनुसार 8 राज्य और 5 केन्द्र्साषित प्रदेश पहलेसे हिन्दू अल्पसंख्यक है. 8 राज्योंमेंसे 4 ऐसे राज्य है जहाँपर हिन्दू अब 10% से भी कम रह गए है. वर्ष 2011 में देशव्यापी जनगणना हुई. इस जनगणना के अनुसार हिन्दुओं का जन्मदर 2001 की तुलनामें 2.64 से घटकर 1.9 हो चूका है . इसका अर्थ है की एक हिन्दू जोड़ा उनके जीवनकालमें 2 से भी कम वच्चों को जन्म दे रहे है, इसका स्वाभाविक अर्थ है की हिन्दुओं की संख्या प्रतिदिन घट रही है. और यह तो 2011 की जनगणना के आंकड़े है, अब तक यह जन्मदर उससे भी कम हो चूका होगा ऐसा हम मानकर चल सकते है. इससे विपरीत मुस्लिम और इसाई की जनसँख्या बढ़ रही है. मुस्लिमों का जन्मदर 2001 के 3.52 से ...

हिन्दुओं की घटती जनसँख्या का उपाय यदि कानून या सामाजिक जागृति से नहीं हो सकता, तो कैसे हो सकता है? - भाग 1

क्या जनसँख्या नियंत्रण कानून हिन्दुओं की घटती हुई जनसँख्या का उपाय हो सकता है? कल एक समूहमें इसी विषय को लेकर चर्चा हुई. इस विषय के बहोत से पहलु है इसलिए इसके ऊपर एक विस्तृत लेख लिखना ही मैंने उचित समजा. हिन्दुओं की घटती जनसँख्या का विषय कुछ देर के लिए हम बाजूमें रखकर यह देखते है की सर्वप्रथम तो, क्या हमारे देशमें जनसँख्या नियंत्रण करनेकी कोई आवश्यकता है भी या नहीं? इस प्रश्न का उत्तर मैं इस लेख में दूंगा, और फिर हिन्दुओं की जनसँख्या बढ़ाने के उपाय मैं अगले लेख, भाग 2 में दूंगा . सर्वप्रथम तो, देश की जनसँख्या, देश का भार कभी नहीं होती. वे देश के संसाधन होते है. इसी लिए उन्हें अर्थशास्त्र की भाषामें "मानव संसाधन" कहा जाता है. तो स्वाभाविक ही है की संसाधन कभी समस्या नहीं होते. जितने अधिक संसाधन उतने अधिक अवसर. समस्या उनके सही उपयोग की, सही शिक्षण की, और सही अवसर प्रदान करनेकी ही होती है. यदि एक देश अपनी प्रजा को यह सब प्रदान कर सकता है तो उसके लिए अधिक जनसँख्या समस्या नहीं, एक वरदान है. चलिए देखते है कुछ देशों के उदहारण...  अमरीका खंड के दक्षिण भाग में आया हुआ देश, वेनेज़ुएला एक...

रावण की असली लंका कहाँ है? श्रीलंका या सुमात्रा?

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जितने भी शोधकर्ताओं ने रावण की असली लंका के स्थान के विषयमें संशोधन किया है, वे सभी एक बात पर तो सहमत है ही, की जो वर्तमान में श्रीलंका देश है वो रावण की असली लंका नहीं है. विविध शोधकर्ता रावण की लंका के विषयमें विविध निष्कर्ष देते है. तमिलनाडु के संशोधक श्री एन. महालिंगम के अनुसार असली लंका अफ्रीका के पश्चिम में आया हुआ मदागास्कर द्वीप है. और कुछ संशोधक ओस्ट्रेलिया को ही असली लंका मानते है. परंतु इस लेखमें मैं वह मत प्रस्तुत करने जा रहा हु जो की मुझे सबसे अधिक गहरा और विश्वसनीय लग रहा है. और वो मत है, असली लंका वर्तमानके सुमात्रा टापू समूह में आई हुई थी . तो चलिए हम देखते है की सुमात्रा के असली लंका होनेके कौन कौनसे प्रमाण उपलब्ध है. विशेष संज्ञान: नीचे दिए गए निष्कर्ष श्री एन एन अधिकारी द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व दिए गए थे. इसके बाद यदि इस विषय के ऊपर अधिक संशोधन हुआ है तो मेरी जानकारी में नहीं है. यदि किसीको इस विषयमें अधिक जानकारी हो तो कृपया मुझे अवगत कराएं. प्रा. एन एन अधिकारी द्वारा इन्डियन नेशनल हेराल्ड में निम्न लिखित प्रमाण दिए थे 1. वायु पुराण के अनुसार रावण की लंका जम्बुद्...

क्या भगवान का मनुष्य्करण योग्य है?

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आपने कितने लोगों को ऐसा कहते सुना है की "राम और कृष्ण भगवान् नहीं, अपितु मनुष्य थे, समय के चलते उनको भगवान् बना दिया गया" , या फिर "यदि राम और कृष्ण को समजना है तो उनको एक सामान्य व्यक्ति की द्रष्टि से देखा जाना चाहिए" ?  बहुत लोगों को आपने ऐसा कहते हुए सुना है, नहीं? बड़े बड़े विचारक, अख़बारों में लिखने वाले लेखक, उपन्यास लेखक, समाज सुधारक, और कुछ तो तथाकथित धर्मात्मा भी ऐसा कहते रहते है. सुननेमें लगती यह तार्किक और सुहावनी बात क्या वास्तवमें सत्य है? ऐसी बातें सच मानने में एक समस्या यह है की जब आप यह बात स्वीकार करते हो, तब आप यह भी स्वीकार करते हो की भारतके हजारों लाखो वर्ष के इतिहासमें हुए अगणित संत, महात्मा और धर्मात्मा सदंतर मुर्ख और अंधश्रद्धालु थे,  क्योंकि वे भगवानों को भगवान् की भांति ही पूजते थे. क्या यह बात मानने योग्य है? तो सत्य क्या है? सौभाग्य से (वास्तवमें दुर्भाग्य से) हमारे पास एक ऐसे समाज का उदहारण है की जो राम-कृष्ण को अपने पूर्वज तो मानते है, उनके जीवन के प्रत्येक आख्यान को भी सच मानते है, परंतु उनको भगवान् के रूप में ना देखते हुए, एक ऐतिहासिक मनु...

क्या कोरोना वायरस के लिए अत्यधिक प्रतिक्रिया आवश्यक है? क्या COVID-19 केंसरसे अधिक घातक है? क्या होना चाहिए भारत देशका अभिगम? (What Should Be India's Response To Corona Virus)

मित्रों, आशा है की आपने कोरोना वायरस और चीन से जुड़ा मेरा इससे पहले वाला लेख पढ़ा होगा. यदि नहीं पढ़ा है तो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते है. यह लेख इस महामारी के फैलने के प्राथमिक चरणमें लिखा गया था इसलिए इसके उदभव और उसके परिणाम पर मैंने अधिक ध्यान दिया था. जैसा की आज आप देख सकते है, जो मैंने लिखा था वो अधिकतर सच हो रहा है. पर अब इस बिमरिके इस चरणमें यह वायरस "कहासे आया" और "क्या कर सकता है" यह बात करनेका समय नहीं है. अब जब यह बीमारी (COVID-19) भारतमें आ चुकी है तो इसके विरुद्ध हमारे देशकी प्रतिक्रिया कैसी होनी चाहिए, यह चिंतन करना आवश्यक है. यही इस लेख का मुख्य विषय है. इस लेखमें मैं इस वायरससे बचने के लिए क्या नुस्खे करने चाहिए यह नहीं बताऊंगा. यह तो आपको Dr. Whatsapp समय समय पर बताते ही रहेंगे 😃. हम यहां एक देश और एक सभ्यताके रूपमें कैसे प्रतिक्रिया दे सकते है इसके बारेमें बात करेंगे. सबसे पहले हम देखेंगे की चीनने कैसे इस बीमारी के विरुद्ध लड़ना ठीक समजा. सर्वप्रथम तो चीनने इस बिमरीको छुपानेका प्रयास किया. फिर जब स्थिति हाथसे सरकती हुई दिखी तो उन्होंने वुह...

क्या चीन सदा के लिए बदलने जा रहा है? क्या कोरोना वायरस के उपरांत चीन बिखरने वाला है? Is China Crumbling After Corona Virus

जब यह लेख लिखा जा रहा है तब चिनमें नोवेल कोरोना वायरस बहोत भयंकर रूपसे फ़ैल चूका है. मेरे अनुमान से इस घटना के बहोत ही दूरगामी परिणाम आने वाले है. मूल विषयको प्रस्तुत करनेके लिए पहले कुछ तथ्यों की पृष्ठभूमि रखना अनिवार्य है, इसलिए पहले कुछ तथ्य रखूँगा और फिर मूल विषय पर आऊंगा. तथ्य १ चीन का इतिहास कालिमाओंसे भरा है. हजारो वर्षोसे चीनी प्रजा को सबने शोषित और प्रताड़ित किया है. चाहे वो जापानी साम्राज्य हो, कोरियाई साम्राज्य हो, वियेतनामी साम्राज्य हो, तिब्बत साम्राज्य हो या निकटके भूतकालमें ब्रिटिश सामराज्य हो. उनकी परंपरा पीड़ित और शोषित होनेकी ही रही है. इसमें सबसे अधिक जपनियोंने उनपर अत्याचार किये है. चीन के मूलनिवासी अनेक बार सशक्त हुए है और उन्होंने अपने साम्राज्य बनानेका प्रयास किया है, परंतु हर बार किसी न किसी कारण वे युद्ध हार जाते है और फिरसे टूट जाते है. उनका सबसे बड़ा साम्राज्य 'हान साम्राज्य' रहा है परंतु वो भी अभी का जो चीन है उससे केवल ३०% ही था. फिरभी उनके इतिहासमें यह एक ही सुवर्ण पृष्ठ होनेके कारण वे हान साम्राज्य को अपना आदर्श मानते है. हान मूल चीन...

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