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तारकासुर - एक समुचित और प्रासंगिक दृष्टिकोण

शास्त्रों का नियमित अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है। जो ऐसा करते है उन सबका यह अनुभव रहा है की जब जब वे एक ही ग्रन्थ बार बार पढ़ते है तो हर बार कोई न कोई ऐसी नई बात सामने आ जाती है की आपके ज्ञान के चक्षु अचानक ही खुल जाते है, और आपका इस जगत को देखनेका दृष्टिकोण बदल जाता है।  माता वरांगी और दैत्य वज्रांग के पुत्र, तारकासुर की कथा वैसे तो प्रचलित और बहुविदित है, परन्तु शिवपुराण पढ़ते पढ़ते आज एक अलग ही दृष्टिकोण मिल गया।  तारकासुर एक अत्यंत बलशाली दैत्य था जिसका एक ही ध्येय था, देवताओं को परास्त करना! असुर वैसे तो देवताओंसे कभी जित नहीं पाते है, इसलिए उनको अत्यधिक कठोर तपस्चर्या करके देवताओं से भी बड़ी शक्तियोंसे, अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, शिव इत्यादि ईश्वरसे वरदान प्राप्त करने पड़ते है। परन्तु असुर परिश्रम करनेसे कभी नहीं चूकते है। अत्यंत कठोर से कठोर तपस्या करके तारकासुरने भगवान् ब्रह्माजी से यह वर प्राप्त कर लिए की वो त्रिलोकीमें सबसे अधिक बलशाली हो जाए और उसकी मृत्यु केवल शिवजी के वीर्य से उत्पन्न हुए पुत्र से ही सके। ऐसा वर उसने इसलिए माँगा क्योंकि माता सती के दक्षयज्ञमें शरीर त्याग ...

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