रावण की असली लंका कहाँ है? श्रीलंका या सुमात्रा?

जितने भी शोधकर्ताओं ने रावण की असली लंका के स्थान के विषयमें संशोधन किया है, वे सभी एक बात पर तो सहमत है ही, की जो वर्तमान में श्रीलंका देश है वो रावण की असली लंका नहीं है.

विविध शोधकर्ता रावण की लंका के विषयमें विविध निष्कर्ष देते है. तमिलनाडु के संशोधक श्री एन. महालिंगम के अनुसार असली लंका अफ्रीका के पश्चिम में आया हुआ मदागास्कर द्वीप है. और कुछ संशोधक ओस्ट्रेलिया को ही असली लंका मानते है. परंतु इस लेखमें मैं वह मत प्रस्तुत करने जा रहा हु जो की मुझे सबसे अधिक गहरा और विश्वसनीय लग रहा है. और वो मत है, असली लंका वर्तमानके सुमात्रा टापू समूह में आई हुई थी.

तो चलिए हम देखते है की सुमात्रा के असली लंका होनेके कौन कौनसे प्रमाण उपलब्ध है.

विशेष संज्ञान: नीचे दिए गए निष्कर्ष श्री एन एन अधिकारी द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व दिए गए थे. इसके बाद यदि इस विषय के ऊपर अधिक संशोधन हुआ है तो मेरी जानकारी में नहीं है. यदि किसीको इस विषयमें अधिक जानकारी हो तो कृपया मुझे अवगत कराएं.

प्रा. एन एन अधिकारी द्वारा इन्डियन नेशनल हेराल्ड में निम्न लिखित प्रमाण दिए थे

1. वायु पुराण के अनुसार रावण की लंका जम्बुद्विप से बहार आई हुई थी. इसलिए उसका भारत खंड से बहार होना अनिवार्य है. इसलिए वर्तमान श्रीलंका देश असली लंका होना असंभव है क्योंकि वह तो भारत खंड का ही एक भाग है.

2. जम्बुद्विप के अतिरिक्त अन्य 6 द्विप जम्बुद्विप के दक्षिण की ओर विद्यमान है. इसमेंसे एक है मलय द्वीप जो की आज का मलेशिया, इंडोनेशिया और उसके निकट के टापू समूह है ऐसा कहा जा सकता है. रामायण के युद्ध कांड के अनुसार रावण की लंका मलय द्वीप के त्रिकुट पर्वत पर रची गई थी (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड 2,10) 

3. हनुमानजी की छलांग 100 योजन की थी (वाल्मीकि रामायण, सुन्दरकाण्ड ६६.9-10). और रामेश्वरम और लंका के बिच बांधे गए सेतु की लम्बाई भी 100 योजन थी (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड २२.५८-६८). इसका अर्थ यह हुआ की लंका रामेश्वरम से १२०० किलोमीटर दूर थी (यद्यपि योजन के नाप में भी विवाद तो है, परंतु 1 योजन = १२ किलोमीटर का नाप बहुस्विकृत है). जबकि वर्तमान श्रीलंका रामेश्वरम से केवल २४ किलोमीटर ही दूर है. योजन के किसीभी नाप के अनुसार 100 योजन २४ किलोमीटर से कही अधिक ही है.

4. निचे दिए गए मानचित्र को देखें. सुमात्रा द्वीप का सबसे निकट का छोर १७०० किलोमीटर है. हम जानते है की इतिहास में समुद्र की ऊंचाई बढ़ गई है और अनेक भूभाग को डूबा दिया है. तो यह संभव है की सुमात्रा की पश्चिम में ४००-५०० किलोमीटर का भूभाग कालांतर में डूब गया हो.


5. लंका को एक 'पूरी' कहा गया है, स्वयं एक द्वीप नहीं. अर्थात लंका किसी द्वीप में बसा हुआ नगर था. जबकि वर्तमान श्रीलंका स्वयं ही एक द्वीप है. यद्यपि सुमात्रा आज इंडोनेशिया देश का एक अंग है, अपितु वास्तवमें पहलेसे इंडोनेशिया और मलेशिया का पूरा ही भूभाग मलय संस्कृति ही था, और सब लोग मलाई भाषा ही बोलते थे. इससे यह कहा जा सकता है की मलय द्वीप एक समान प्रजाति से भरा हुआ एक बड़ा द्वीप था और उसमें अनेक नगर बसे हुए थे. इन्ही नगरोंमें से एक नगर वर्तमान समय का सुमात्रा, जो की असली लंका हो सकता है.

6. फ्लोरिज द्विप के निवासी राक्का कहे जाते थे. राक्का शब्द मूल संस्कृत शब्द राक्षस के साथ मिलता जुलता है. राक्का वहां के मूल निवासी है जो की काले रंग के, भयंकर रूप वाले, सशक्त और अतिक्रूर स्वाभाव के होते है. रावण की राक्षश जाती के साथ यह वर्णन मिलता जुलता है.

7. सुमात्रा द्वीप में ही एक लारान्तक नामक नगर बसा हुआ है. रावण की सेना में एक नरान्तक नमक भयंकर योद्धा था की जिसके नाम से इस नगर का नाम पड़ा हो सकता है.

8. सुमात्रा द्वीपसमूह में ही एक 'सोमलंगा' नामक नगर विद्यमान है. इतिहास में वह नगर 'सोनिलंका' के नामसे जाना जाता था. यह नाम 'स्वर्ण लंका' के साथ मिलता जुलता है. इतना ही नहीं, यह नगर बिलकुल समुद्रतट पर बसा हुआ है. आज भी (अर्थात जब यह लेख लिखा गया था, अर्थात 100 वर्ष पूर्व) सुमात्रा द्वीप उसके सोने के लिए प्रचलित है. 

9. वहाँपर एक 'लंकता' (अथवा लंता) नमक नगर भी है की जिसकी उत्तर में 'गोल्डन माउंटेन' पड़ता है. यह पर्वत रामायण में वर्णित 'कंचन गिरी' पर्वत हो सकता है. सुमात्रा की पूर्व में एक 'रूपत' नामक द्वीप है. रामायण में स्पष्ट उल्लेख है की रावण की लंका के पास एक 'रूपक' नमक द्वीप विद्यमान है. वो यह द्वीप हो सकता है. और वर्तमान श्रीलंका के आसपास कोई द्वीप नहीं है.

10. भास्कराचार्य ने अवन्ती का स्थान दर्शाने के लिए लंका का सन्दर्भ दिया है. इस सन्दर्भ में लंका नगरी को "निरक्ष" कहा गया है. अर्थात, जिसके स्थान पर कोई अक्ष नहीं है, अर्थात शून्य रेखौंश है. सुमात्रा ठीक शून्य रेखौंश पर ही आया हुआ है. जबकि वर्तमान श्रीलंका 8 रेखांश पर विद्यमान है. देखिए निचे का चित्र.


उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह पर्याप्त रूपसे प्रस्थापित होता है की असली लंका वर्तमान श्रीलंका नहीं है, अपितु सुमात्रा ही है. इसके अतिरिक्त मेरे अपने भी कुछ निष्कर्ष है जो की निम्न लिखित है.


मेरे अपने निष्कर्ष:

1. रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण, दोनोमें ही लंका को एक अतिदुर्गम स्थान बताया गया है. वर्तमान श्रीलंका किसीभी प्रकारसे अतिदुर्गम स्थान नहीं है. उस समय की लंबी लंबी छलांगे मारनेमे सक्षम वानर प्रजाति और हवामें उड्नेकी क्षमता रखने वाली राक्षस प्रजाति के लिए मात्र २४ किलोमीटर दूर रही लंका कोई दुर्गम स्थान नहीं हो सकती. नौका तकनिकी भी उस समय अत्यंत विकसित थी (वानर सेना ने नौका मार्ग से लंका पहोंचनेका परामर्श दिया था, किंतु विभीषण ने उसमें सामरिक जोखिम बताकर प्रस्ताव टाल दिया था) और फिर २४ किलोमीटर समुद्र में तैर कर जाने वाले लोग तो आज भी मिल जाते है. इसलिए वर्तमान श्रीलंका किसीके लिए भी दुर्गम स्थान नहीं था. वैसे भी, श्रीलंका आर्यावर्त और भरतखंड का ही एक भाग है और था. सुमात्रा ही सुदूर स्थित एक दुर्गम द्वीप है.

૨. रावण जब सीता माता को लेकर पुष्पक विमान में उड़ा तब निचे जो जो भूमि के स्थान वर्णित किये गए है (जैसे की महेंद्र्गिरी पर्वत, किष्किन्धा, जटायु का स्थान इत्यादि) वे स्थान पुष्पक विमान के उड्डयन की रेखा और मार्ग दिखाते है. यह जो मार्ग वर्णित किया गया है वह सुमात्रा जाने के लिए बिलकुल सीधा सीधा लागु होता है. यद्यपि यह उड्डयन मार्ग वर्तमान श्रीलंका जाने के लिए भी उचित है, परंतु यह बात बिलकुल निश्चित है की रावण दक्षिण पूर्व दिशा की और गया था, ना की दक्षिण पश्चिम की और. इसलिए मडागास्कर, मालदीव इत्यादि जैसे पश्चिमी ओर के द्वीप को लक्ष में लिया नहीं जा सकता.

3. रामचरितमानस स्पष्ट रूपसे वर्णित करता है की लंका की चारो ओर अत्यंत गहरा सागर फैला हुआ था. श्रीलंका के निकट जो सागर है वो छिछला है. जबकि सुमात्रा के निकट का सागर बहोत गहरा है. देखें निचे दिया गया समुद्र की गहराई का ૩D मानचित्र.

श्रीलंका के निकट रहे समुद्र की गहराई... 

सुमात्रा के निकट वाले समुद्र की गहराई 


4. आज भी इंडोनेशिया में रामायण की संस्कृति कोने कोने में देखनेको मिलती है. विष्णु भगवान और उनके वाहन गरुड़ का भी अनन्य महत्त्व है. उनकी अपनी एक रामायण भी है. और वहां के लोग राम भगवान को अपने पूर्वज भी मानते है. विविध स्थान पर दैनंदिन रामलीलाओं का मंचन होता है. वहां के स्थानों के नाम भारतीय नामों से बहोत मिलते जुलते है. और उनकी भाषा और शब्दों में भी संस्कृत के साथ एक विशेष साम्य है.

इस प्रकार यह स्पष्ट रूपसे कहा जा सकता है की वर्तमान श्रीलंका तो असली लंका अवश्य ही नहीं है. सुमात्रा असली लंका होनेकी संभावना सबसे अधिक है.

__/\__ जय सिया राम __/\__ 

Comments

  1. Good & Perfect
    Hanuman G ki 100 yojan ki chalang isse siddh ho sakti hai ye hi original Lanka hai.

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