क्या चीन सदा के लिए बदलने जा रहा है? क्या कोरोना वायरस के उपरांत चीन बिखरने वाला है? Is China Crumbling After Corona Virus

जब यह लेख लिखा जा रहा है तब चिनमें नोवेल कोरोना वायरस बहोत भयंकर रूपसे फ़ैल चूका है. मेरे अनुमान से इस घटना के बहोत ही दूरगामी परिणाम आने वाले है.

मूल विषयको प्रस्तुत करनेके लिए पहले कुछ तथ्यों की पृष्ठभूमि रखना अनिवार्य है, इसलिए पहले कुछ तथ्य रखूँगा और फिर मूल विषय पर आऊंगा.

तथ्य १

चीन का इतिहास कालिमाओंसे भरा है. हजारो वर्षोसे चीनी प्रजा को सबने शोषित और प्रताड़ित किया है. चाहे वो जापानी साम्राज्य हो, कोरियाई साम्राज्य हो, वियेतनामी साम्राज्य हो, तिब्बत साम्राज्य हो या निकटके भूतकालमें ब्रिटिश सामराज्य हो. उनकी परंपरा पीड़ित और शोषित होनेकी ही रही है. इसमें सबसे अधिक जपनियोंने उनपर अत्याचार किये है.

चीन के मूलनिवासी अनेक बार सशक्त हुए है और उन्होंने अपने साम्राज्य बनानेका प्रयास किया है, परंतु हर बार किसी न किसी कारण वे युद्ध हार जाते है और फिरसे टूट जाते है. उनका सबसे बड़ा साम्राज्य 'हान साम्राज्य' रहा है परंतु वो भी अभी का जो चीन है उससे केवल ३०% ही था. फिरभी उनके इतिहासमें यह एक ही सुवर्ण पृष्ठ होनेके कारण वे हान साम्राज्य को अपना आदर्श मानते है. हान मूल चीनी प्रजा है. बाकि सब अन्य प्रजा है जिनसे हान घृणा करते है.

अभी 30 वर्ष पहले तक भी चीनी प्रजा शोषित ही थी. इसबार उन्हें कोम्युनिस्ट गुंडे शोषित कर रहे थे. अभी का जो चीन है वह भी मानवाधिकार की द्रष्टिसे आदर्श नहीं है. फिरभी आजका चीन इतिहासमें सबसे बड़ा और सबसे धनवान चीन है.

तथ्य २

भारत 1962 का युद्ध हारा नहीं था, नेहरूने सरेंडर करते हुए लड्नेसे माना कर दिया था. अन्यथा भारतकी जित निश्चित थी. चीन के डरपोक लोग कभी युद्ध जीते नहीं है. यह विषय लंबा है इसलिए इतना ही कहता हु की हम 1962 में भी जित सकते थे और आज भी युद्धमें चीन को बहोत बुरी तरह हरा सकते है.

तथ्य 3

अमरीका की सहायतासे चीन पिछले 20 वर्षोमें बहोत प्रगति कर चूका है. परंतु उनकी महत्वाकांक्षा बहोत बड़ी है. उन्हें अपने "हान साम्राज्य" को पूरी दुनियामें फैलाना है. उन्हें आज जो अमरीका का विश्वमें स्तर है, वो भी कम लग रहा है. उन्हें जो अंग्रेजोंका स्तर अपने चरम पर था, वह स्तर हान साम्राज्य के लिए चाहिए. इसलिए वे पूरी दुनियामें अपना बहोत बड़ा जाल फैला चुके है. उनका पहला और एकमात्र प्रतिद्वंदी अमरीका है. इसलिए उन्होंने अमरीका में अपने गुप्तचरोंके और इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों के गुप्त जाल इतने गहरे फैला दिए है की अब अमरीकामें किसकी सरकार बनेगी इसमें भी हस्तक्षेप कर सकते है.

अनेक मिलिटरी तकनिकी, उच्च बायोलॉजिकल तकनिकी, प्रोडक्शन तकनिकी, स्पेस तकनिकी चीन ने अमरीका से चुरा ली है. आज के समयमें किसीभी जानेमाने व्यक्ति के लिए अमरीकामें फोन से कोई भी बात करना या चेट करना सुरक्षित नहीं है.

इन सबसे ट्रंप बहोत गुस्सेमें है. हिलरी क्लिंटन और अन्य डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता, सब चीनी पैसो से काम करते है. इसी लिए ट्रंपने चीन के साथ ट्रेड वोर छेड़ रखा है.

तथ्य 4

अमरीका को अपना एकचक्री साशन बनाये रखनेमे समस्या आ रही है. अंग्रेजों की भांति दुनियाकी पूरी प्रजा का खुला शोषण करना अब इस युगमें संभव नहीं है. उनके लिए शोषणका एक ही माध्यम है, डॉलर. यही कारण है की वे तेल वाले देशोंमें सबसे अधिक आक्रामक निति अपनाते है, क्योंकि तेल का व्यव्हार डॉलर से बना रहे.

परंतु केवल डॉलर का पावर पर्याप्त नहीं है. जैसे जैसे एशियाई देशोंकी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे सब डॉलर का विकल्प ढूंढने लगे है. अमरीका के लिए अपनी आवश्यकताओंकी पूर्ति के लिए एशियाई देशोंसे आयात करना अनिवार्य है. इसी लिए चीन को आगे लाया गया था. परंतु अन्य प्रत्येक सभ्यताओं की भांति ही, चीन की भी अपनी महत्वाकांक्षा है. यह बात अमरीका को बहोत देर से समजमें आई.

तथ्य 5

जैसा मैंने कहा, प्रत्यके सभ्यताकी अपनी महत्वाकांक्षा होती है. इस्लामीयों की भी अपनी महत्वाकांक्षा है. यूरोपियन प्रजा की भी अपनी महत्वाकांक्षा है. परंतु यह दोनों ही अब पीछे जा रहे है. यहांसे उनके लिए केवल अंधकार ही अंधकार है.

एक और महान ऐतिहासिक शक्ति है जिसकी अपनी महत्वाकांक्षा है. भारत.

भारतकी महत्वाकांक्षा अन्य महत्वाकांक्षियोंसे भिन्न है. भारत पुरे इतिहासमें एक अविजयी और कल्याणकारी सत्ता रही है. भारतके हजारों वर्षोके इतिहासमें पिछले 500 वर्ष नगण्य है जिसमें भारत पीछे रहा है. भारत ना कभी पीछे रहा है, और ना रह सकता है.

भारतकी महत्वाकांक्षा इसलिए भिन्न है क्योंकि भारत जानता है की किसीका शोषण करना ना ही धर्म के अनुकूल है, और ना ही इससे लंबे समय तक उच्च सत्ता बना रहा जा सकता है. भारतको हजारों लाखो वर्षो तक सर्वोच्च सत्ता रहनेका अनुभव है. इसकी तुलनामें अमरीका को एक उच्च सत्ता बने केवल 50 वर्ष हुए है, और अभिसे लडखडाने लगे है. भारत पुरे विश्वको केवल योग्य दिशा दर्शन देनेंका और पुरे विश्वका समुचित अभ्युदय करनेकी महत्वाकांक्षा रखता है. भारत अब आगे बढ़ चूका है और अपना स्थान अवश्य ही प्राप्त करेगा.

तथ्य 6 

सत्तामें आनेके बाद 2015 में प्रधानमंत्री मोदीजीने चीन का प्रवास किया था. तब उन्होंने चीन के समक्ष प्रस्ताव रखा था की भारत और चीन मिलकर इस सदी को एशिया की सदी बना सकते है. दोनों मिलकर अमरीका को यहासे भगा सकते है और डॉलर का साम्राज्य मिटा सकते है. तब चीन ने मना कर दिया.

फिर जिनपिंग का भारत दौरा हुआ तब भी यही प्रस्ताव भारतने रखा, परंतु तब भी वे नहीं माने और भारतमें कम्युनिस्ट एक्टिविटी और बढ़ा दी. नेपाल को भारतके विरुद्ध कर दिया. और सबसे बड़ी घात डोकलाम पर की. उस दिन भारतीय प्रशाशन समज गया की चीन बातों का भुत नहीं है. और चीन के साथ मिलकर ना कभी भारतने सामराज्य खड़ा किया है, और ना ही कर पायेगा.

इतने तथ्य आवश्यक थे विषयकी पृष्ठभूमि तैयार करनेके लिए.

अब आता हु मूल विषय पर...

वर्तमानमें अमरीका चीन के इलेक्ट्रोनिक गुप्तजालसे बहोत डरा हुआ है. चीनी पैसों से अमरीकी नागरिकों को अत्यंत कनिष्ट शिक्षण दिया जा रहा है. यदि ऐसा ही चला तो 1 ही जनरेशनमें अमरीका का साम्राज्य समाप्त हो जाएगा. चीन अमरीकी पोलिटिक्समें भी बहोत गहरा है. ट्रंप देशप्रेमी है. उसे और सी आई ऐ के अधिकतर अधिकारीयों को पता है की चीन को दबाना आवश्यक है.

इसके लिए ट्रंपने ट्रेड वोर तो किया ही, साथ ही साथ, हांगकांग वाली क्रांति भी करवाई. हांगकांग की क्रांतिमें सभी लोग अमेरिकी पेन्टाकोस्टल चर्च से जुड़े कार्यकर्त्ता ही थे.

फिर दिसम्बर में एक समाचार आता है की चीनमें एक नया वायरस फ़ैल रहा है जिसका नाम नोवेल कोरोना वायरस है. यह वायरस वैसे नया नहीं है, परंतु इसके कुछ लक्षण पुराने वाले कोरोना वायरस से अलग है. यह समाचार चीनी डॉक्टर ली वेनलियांग सबसे पहले सोशल मिडिया के माध्यम से सबको देते है. तुरंत ही इस डॉक्टर और उसके सभी विद्यार्थियों और सहायकों को "अफवा फ़ैलाने" के इए जेलमें दाल दिया जाता है.

कुछ ही समयमें यह बात साफ़ हो जाती है की यह अफवा नहीं थी. चीन का पूरा हुबेई प्रान्त रुक जाता है. उसका सबसे बड़ा शहर वुहान अब इस वायरस से ग्रस्त हो चूका है. बीमारी चीन के अन्य प्रान्तोंमें भी फ़ैल रही है.

इसी बिच विश्वकी अनेक बड़ी बड़ी लेबोरेटरी (जिसमें दिल्ली की लेबोरेटरी भी शामिल है) से ऐसे रिपोर्ट आते है की यह वायरस पुराना कोरोना वायरस नहीं है. इसके जिन्स की एक सिकवंस HIV से 60% मिलती है. प्राकृतिक रूपसे किसीभी जिन सिकवंस का इतना मिलता जुलता होना असंभव है. यह मानवीय कार्य है और किसी लेबोरेटरी में ही किया गया है.

यहाँ एक बात महत्वपूर्ण है. कोरोना वायरस ऐसा वायरस है जो बहोत जल्दी फैलता है, पर वो बहोत जल्दी मर भी जाता है. इसलिए बहोत बड़ी जिवहानि नहीं करता. जबकि HIV कभी मरता नहीं, पर वो इतनी सरलतासे संक्रमित भी नहीं होता. इसलिए इतना विनाशक नहीं है. परंतु यह नोवेल कोरोना वायरस दोनोका मिश्रण है जो की अत्यधिक फैलता है, और जल्दी मरता भी नहीं है. इसका अर्थ है की यह वायरस बहोत ही बड़ी मात्रामें जिवहानी करनेके लिए बना हुआ है.

हालाँकि चीन आधिकारिक रूपसे यही कह रहा है की संक्रमित चमगाद खानेसे यह महामारी फैली है, पर जिनेटिक्स के विशेषग्य यह बात नहीं मानते. अब संभावनाएं अनेक है.

1. क्या ये वायरस "बायो वेपन" के तौर पर चीन अपनी लैब में बना रहा था और कोई अकस्मात् से यह वुहान में फ़ैल गया? (अधिकतर लोग ऐसा ही मानते है)

2. क्या किसी विदेशी शक्तिने यह बीमारी फैलाई है? 

3. क्या चीन अपनी आबादी कम करनेके लिए स्वयं ही ऐसा कर रहा है? (चीन में ऐसा होना कोई बहोत बड़ी बात नहीं है)

अब सच क्या है, यह तो समय ही बताएगा. हम अभी तो केवल अनुमान ही कर सकते है.  मेरा अनुमान है की बाहरी शक्ति द्वारा यह किया जाना सबसे बड़ी सम्भावना है. इसके अनेक कारण है, जिसमेसे सबसे बड़ा कारण यह है की हुबेई प्रान्त जहाँ यह बीमारी सबसे पहले प्रसारित हुई है, वह प्रान्तमें सबसे अधिक जनसँख्या हान समुदाय की है. और उनकी पवित्र नदी 'हान' भी वहीँ से बहती है. 'हान सामराज्य' का नाम भी इसी नदी के उपरसे रखा गया है. इसलिए यदि आप वर्तमान चीनी प्रशाशन के शत्रु है तो यह स्थान महामारी फ़ैलाने के लिए सबसे उचित है.

परंतु मेरी रूचि केवल इसमें नहीं की यह काम किसका है. मेरी रूचि इसमें है की आगे क्या होता है....

डॉक्टर "ली वेलियंग" जिनको जेलमें डाल दिया था उनकी दो दिन पहले मृत्यु हो चुकी है. उन्हें भी यह वायरस ने ग्रसित कर लिया था. अब चीनमें इसके विरुद्ध बहोत ही रोष है. लोग सड़कों पर नहीं आ रहे क्योंकि वे रोग से संक्रमित नहीं होना चाहते. पर वे अब वर्तमान प्रसाशन को उखाड़ फैंकनेके लिए प्रतिबद्ध हो चुके है.

आर्थिक परिस्थिति पहलेसे बिगडी हुई है. उसमें यह महामारी आनेके कारण और नुकसान हुआ है. कमसे कम 4 महीने के लिए चीन के बहोत बड़े क्षेत्रमें उत्पादन का कार्य संभव नहीं है. इसलिए लोगोंका असंतोष और बढेगा. 

इस समय पश्चिमी देश चीन का विकल्प ढूंढ रहे है. यही समय है भारतके लिए की इस अवसर को जाने ना दें. कुछभी करके चीन का थोडा बहोत व्यापर हम हस्तगत कर लें.

भारतके लिए पाकिस्तान विरुद्ध भी सामरिक शक्ति दिखाना अब बहोत सरल हो गया है. चीन को इस महामारी से उठते हुए कमसे कम एक वर्ष लगेगा. और जब उठेगा तब वो, वो चीन नहीं होगा जिसे हम आज जानते है. मेरा यह लेख आप संभालकर रखिए. चीन आर्थिक और राजकीय रूपसे बिखरने वाला है. यह बड़ी सत्ताओने निश्चय कर लिया है.

और फिर एक दिन फिरसे कैलाश पर्वत और मानसरोवर भारतके अभिन्न अंग होंगे. तथास्तु.

(कोरोना वायरस के लिए भारतका क्या अभिगम होना चाहिए, क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ये जानने के लिए मेरा यह लेख पढ़ें - https://devsmruti.blogspot.com/2020/03/covid.html )

धन्यवाद. 🙏

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