क्या कोरोना वायरस के लिए अत्यधिक प्रतिक्रिया आवश्यक है? क्या COVID-19 केंसरसे अधिक घातक है? क्या होना चाहिए भारत देशका अभिगम? (What Should Be India's Response To Corona Virus)

मित्रों, आशा है की आपने कोरोना वायरस और चीन से जुड़ा मेरा इससे पहले वाला लेख पढ़ा होगा. यदि नहीं पढ़ा है तो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते है. यह लेख इस महामारी के फैलने के प्राथमिक चरणमें लिखा गया था इसलिए इसके उदभव और उसके परिणाम पर मैंने अधिक ध्यान दिया था. जैसा की आज आप देख सकते है, जो मैंने लिखा था वो अधिकतर सच हो रहा है. पर अब इस बिमरिके इस चरणमें यह वायरस "कहासे आया" और "क्या कर सकता है" यह बात करनेका समय नहीं है. अब जब यह बीमारी (COVID-19) भारतमें आ चुकी है तो इसके विरुद्ध हमारे देशकी प्रतिक्रिया कैसी होनी चाहिए, यह चिंतन करना आवश्यक है. यही इस लेख का मुख्य विषय है.

इस लेखमें मैं इस वायरससे बचने के लिए क्या नुस्खे करने चाहिए यह नहीं बताऊंगा. यह तो आपको Dr. Whatsapp समय समय पर बताते ही रहेंगे 😃. हम यहां एक देश और एक सभ्यताके रूपमें कैसे प्रतिक्रिया दे सकते है इसके बारेमें बात करेंगे.

सबसे पहले हम देखेंगे की चीनने कैसे इस बीमारी के विरुद्ध लड़ना ठीक समजा. सर्वप्रथम तो चीनने इस बिमरीको छुपानेका प्रयास किया. फिर जब स्थिति हाथसे सरकती हुई दिखी तो उन्होंने वुहान महानगर को पूरा बंधक बना दिया. फिरभी परिस्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो वुहान जिस प्रान्तमें है उस पुरे हुबेई प्रान्तको ही बंधक बना दिया. चीनी सरकार द्वारा "चाइनिस-न्यू-यर" की छुटियाँ मनाने गए अनेको करोड़ों चीनियोंको अपने अपने गांवमें ही रहनेको बोला गया ताकी महानगरोंमें बीमारी ना फैले. अब इसका परिणाम यह आया की पुरे चीनका अर्थतंत्र अभी थम गया है. सारे कारखाने बंध है. हुबेई प्रान्त चिनमें सबसे अत्याधुनिक तकनिकी उत्पादनोंका उत्पादक है जो अभी पूरा ठप्प है, और अगले 6 महीनों तक ठप्प ही रहेगा. इस दौरान दुनियाके ग्राहक चीनका स्थायी विकल्प खोज रहे है. इसका अर्थ है की इस महामारीके बाद चीनी अर्थतंत्रको यहांसे निचे ही गिरना है. उच्चतम तकनिकी ना बिकनेके कारण इस क्षेत्रमें वे अभी जहाँ है वहीँ रहेंगे. आगे बढ़ना बहोत कठिन है.

यहाँ चीनकी वर्तमान परिस्थितिकी तुलना 70 के दशक के जापान से की जा सकती है. उस समय जापानी अर्थतंत्र भी अपनी चरम सीमा पर था. वे भी पूरी दुनिया पर राज करनेके सपने देखते थे और इन सपनोको उन्होंने गुप्त भी नहीं रखा था. अपने प्रचार-मध्यमोंके माध्यमसे वे बार बार विश्वको यही सन्देश दे रहे थे की अब अगली महासत्ता जापान बनेगा और इसलिए विश्वको जापानके आधिपत्य के लिए तैयार हो जाना चाहिए. परन्तु केवल 10 वर्षोंके अन्दर ही वहां मंदी का दौर शुरू हुआ, और उसके बाद आजतक विश्वने जापानकी ओरसे कुछ उल्टा-सीधा नहीं सुना!

अब बात करते है भारतकी. भारतमें बहोत बड़ी जनसँख्या है और स्वाभाविक रूपसे ही यहाँ अनेक प्रकारकी बिमारियोंसे रोज बहोत सारे लोग मरते है. इसलिए इस नयी बीमारी COVID-19 की तुलना सबसे अधिक मारने वाली अन्य बीमारीसे करी जानी चाहिए. यह बीमारी है केंसर. निचे दिए गए कोष्टक (table) में मैंने दोनों बिमारियोंकी तुलना की है. कृपया इसे ध्यानसे पढ़ें.

Cancer
COVID-19
केवल भारत देशमें 25 लाख लोग केंसर पीड़ित है और हर वर्ष नए 1.15 लाख नए केस बन रहे है.
पुरे विश्वमें अबतक 90 हजार केस दर्ज हुए है. यदि हम चीनी आंकड़ों पर भरोसा ना भी करें तो भी 25 लाख से अधिक केस होना कठिन है.
इस बीमारी के शिकार प्रत्येक वर्ष बढ़ रहे है. इसका अर्थ है की अगले साल कमसे कम 1.15 लाख तो नए केंसर के केस बनने ही वाले है.
कोई भी महामारी 1 साल से अधिक नहीं टिकती. इसका अर्थ यह है की अगले वर्ष COVID-19 का एक भी केस नहीं बनेगा. यह बात अलग है की यह बीमारी भविष्यमें फिरसे कभी देखि जा सकती है.
प्रतिवर्ष केंसरसे 7.8 लाख लोग केवल भारतमें मरते है.
दुनियाभरमें आधिकारिक रूपसे अभीतक 3 हजार लोग मरे हैं. यदि हम चीनी आंकड़ों पर भरोसा ना भी करें तो भी यह संख्या 10 लाख से अधिक होनेकी सम्भावना कम है.
केंसरका Mortality Rate अर्थात एकबार बीमारी होनेके बाद मृत्यु दर 65% है. अर्थात केंसर होनेके उपरांत आपके मृत्यु होनेकी सम्भावना 65% है.
वैश्विक आधिकारिक रूपसे मृत्युदर 3.7% है. यह दर पुरे विश्वके दर्दियों से लिया गया है इसलिए सही माना जा सकता है.
यदि आप एक भारतीय हैं, तो आपको 75 की आयु तक केंसर होनेकी सम्भावना 9.6% है.
चीन जहां यह बीमारी सबसे अधिक फैली हुई है वहां भी आधिकारिक रूपसे केवल 0.007% लोग ही COVID-19 के शिकार हुए है. फिरसे यदि हम चीनी आंकड़ों को ना माने, और पुरे के पुरे हुबेई प्रान्त को ही बीमार मान ले – जो की असंभव है – फिरभी एक चीनी के लिए संक्रमित होनेकी 3% से अधिक सम्भावना नहीं है.
60 वर्ष से कम आयुमें किसीभी भारतीय को केंसर होनेकी संभावना – 4.5%
आधारभूत आंकड़े अप्राप्य है परन्तु विविध विवेचन के अनुसार यह आंकड़ा 2% से अधिक नहीं हो सकता.

ऊपरके आंकड़े देखते ही आपको यह समज आ गया होगा की केंसर COVID-19 से कितनी बड़ी बीमारी है. COVID-19  तो एक वर्ष में चला जाएगा, परन्तु केंसर तो प्रतिवर्ष बढ़ ही रहा है. केवल इसलिए की केंसर एक संक्रमण से फैलने वाली बीमारी नहीं है, किसीको इसके बारेमें चिंता नहीं है. सबका जीवन फिरभी चल ही रहा है.

अब सवाल यह उठता है की जो प्रतिक्रिया चीनने COVID-19 के लिए दी, क्या वो सही थी? क्या ऐसा आत्यंतिक अभिगम अनिवार्य था? इसके आर्थिक दुष्परिणाम के लिए क्या चीन तैयार है? मेरे मंतव्य से तो इन सब प्रश्नोंका उत्तर है "बिलकुल नहीं".

इसीलिए, भारतको COVID-19 फैलता हुआ रोकनेके लिए सारे उपाय करना आवश्यक है, परन्तु इसके लिए देशके अर्थतंत्र को रोक देना, बहोत बड़े जनसमुदाय को अकारण ही बंधक बना देना, देशका भविष्य दांव पर लगा देना... यह सब करना मुर्खता होगी. और वो भी तब जब यह प्रस्थापित हो चूका है की COVID-19 से मरने वालोंमेंसे 70% लोग 60 की आयु से अधिक है. 

सुननेमें यह बात बहोत निर्दयी लगेगी, परंतु देशकी नीतियाँ देशके उन नागरिकों के लिए बनाई जाती है जो की 50-60 वर्ष बाद मरने वाले है, ना की उनको देखकर जो की 10 सालमें मरने वाले है. यह बात हम केंसर के परिपेक्ष्यमे समज सकते है, तो फिर COVID-19 के सन्दर्भमें क्यों नहीं?

बिमारियों से लोग मरते है. परंतु इसका अर्थ यह नहीं की अर्थतंत्र भी उनके साथ मर जाए. जो लोग जियेंगे उनके लिए खुशहाल जीवन कैसे सुरक्षित किया जाए, यही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.

धन्व्यवाद 🙏

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